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सीखें पर वापस

पवित्र पाक कला (साधना)

रसोई को मंदिर में बदलना

वैदिक परंपरा में, खाना बनाना एक आध्यात्मिक अभ्यास (साधना) है। भोजन को 'ब्रह्म' (दिव्य चेतना) माना जाता है। रसोइye की ऊर्जा और इरादा भोजन में समा जाते हैं, जो इसे खाने वाले व्यक्ति को सीधे प्रभावित करते हैं।

आहार (Diet)

भोजन जीवन का पहला स्तंभ है। आयुर्वेद में 'जैसा खाए अन्न, वैसा होए मन' सच है—हमारे ऊतक हमारे भोजन के सार से बनते हैं।

प्राण (Life Force)

ताजा, स्थानीय रूप से प्राप्त और हाल ही में पकाया गया भोजन प्राण से भरपूर होता है। डिब्बाबंद, जमा हुआ या बासी भोजन अपनी यह महत्वपूर्ण ऊर्जा खो देता है।

सजगता (Mindfulness)

क्रोध या व्याकुलता के साथ खाना बनाना विषाक्त भोजन बनाता है। प्रेम और मंत्रोच्चार के साथ खाना बनाना स्वास्थ्यवर्धक भोजन (प्रसाद) बनाता है।

दैनिक अभ्यास

  • 1रसोई को साफ और व्यवस्थित रखें।
  • 2शांत और सकारात्मक मन से खाना बनाएं।
  • 3ताजी, उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग करें।
  • 4अपनी इंद्रियों को संलग्न करें: मसालों को सूंघें, बनावट को महसूस करें।
  • 5खाने से पहले भोजन (मानसिक या शारीरिक रूप से) अर्पित करें।