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शरद
शरद ऋतु
सितंबर - अक्टूबर
संक्रमण, स्वच्छ आकाश और सुखद तापमान की ऋतु
ऋतु अवलोकन
प्रमुख दोष
संचय: कोई नहीं
प्रकोप: पित्त दृढ़ता से प्रकुपित होता है
अवधि
मध्य सितंबर से मध्य नवंबर
विशेषताएं
स्वच्छ आकाश, अचानक गर्मी (मानसून के बाद), उमस
शारीरिक परिवर्तन और विशेषताएं
- मानसून की ठंड के बाद अचानक धूप का निकलना जमा पित्त को प्रकुपित करता है
- पाचन अग्नि मानसून की तुलना में बेहतर होती है लेकिन पित्त से प्रभावित होती है
- त्वचा संक्रमण और पित्त विकारों की प्रवृत्ति
- रक्त की अशुद्धि की संभावना
- प्यास और भूख में वृद्धि
- चिड़चिड़ापन और क्रोध में वृद्धि
🍽️आहार संबंधी दिशा-निर्देश
✅ अनुकूल रस (स्वाद)
मधुर (मीठा)तिक्त (कड़वा)कषाय (कसैला)
⚠️ कम करने योग्य रस (स्वाद)
अम्ल (खट्टा)लवण (नमकीन)कटु (तीखा)
🚫 वर्जित भोजन
- अत्यधिक नमकीन और मसालेदार भोजन
- तला हुआ और भारी भोजन
- खट्टे फल और सिरका
- दही (विशेष रूप से दिन में)
- लाल मांस
- शराब
- लहसुन और प्याज (गर्म)
- तले हुए खाद्य पदार्थ
🧘 जीवनशैली अभ्यास
दैनिक चर्या
- • चंद्रमा की रोशनी में समय बिताएं (शीतल प्रभाव)
- • चंदन और कपूर का लेप लगाएं
- • हल्के और सफेद कपड़े पहनें
- • शाम को बगीचों और जलाशयों के पास टहलें
- • दोपहर की कड़ी धूप से बचें
व्यायाम
- • हल्का व्यायाम
- • तैराकी
- • शीतल योग आसन
- • चंद्र नमस्कार
📚 मौसमी ज्ञान
शरद ऋतु में पित्त का प्रकोप चरम पर होता है। 'हंसोदक' (वह पानी जो दिन में सूरज की किरणों से गर्म और रात में चांद की रोशनी से ठंडा होता है) इस ऋतु में अत्यंत लाभकारी और त्रिदोष नाशक माना जाता है।