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वर्षा
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वर्षा

वर्षा ऋतु

जुलाई - अगस्त

पोषण देने वाली वर्षा, ठंडी बौछारों और हरी-भरी हरियाली की ऋतु

ऋतु अवलोकन

प्रमुख दोष

संचय: पित्त का संचय जारी रहता है (शरद ऋतु में प्रकुपित होगा)

प्रकोप: वात दृढ़ता से प्रकुपित होता है

अवधि

मध्य जुलाई से मध्य सितंबर

विशेषताएं

बरसाती, नम, गर्मी के बाद ठंडा

शारीरिक परिवर्तन और विशेषताएं

  • वर्ष की सबसे कमजोर पाचन शक्ति
  • वायुमंडलीय अम्लता और नमी के कारण वात प्रकोप
  • गर्मी से जमा पित्त (अभी तक प्रकुपित नहीं हुआ)
  • संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि
  • जोड़ों का दर्द और शरीर में दर्द
  • भूख न लगना
  • भारीपन का अहसास
  • बलगम और जकड़न में वृद्धि

🍽️आहार संबंधी दिशा-निर्देश

✅ अनुकूल रस (स्वाद)

अम्ल (खट्टा)लवण (नमकीन)मधुर (मीठा - संयम में)

⚠️ कम करने योग्य रस (स्वाद)

तिक्त (कड़वा)कषाय (कसैला)कटु (तीखा - पाचक मसालों को छोड़कर)

🚫 वर्जित भोजन

  • भारी, तैलीय भोजन
  • ठंडे खाद्य और पेय पदार्थ
  • आइसक्रीम और जमे हुए डेसर्ट
  • कच्ची सब्जियां और सलाद
  • पत्तेदार साग (पालक, मेथी, साग)
  • किण्वित खाद्य पदार्थ (अचार, दही)
  • सड़क किनारे का भोजन और रेस्टोरेंट का खाना
  • बासी या पुराना खाना

🧘 जीवनशैली अभ्यास

दैनिक चर्या

  • जल्दी उठें
  • गर्म तिल या सरसों के तेल से मालिश करें
  • गर्म पानी से स्नान करें
  • हमेशा सूखा रहें, गीले कपड़ों से बचें
  • सूखे और साफ कपड़े पहनें

व्यायाम

  • केवल हल्का व्यायाम
  • इनडोर योगासन
  • प्राणायाम
  • भारी शारीरिक श्रम से बचें
  • बारिश में भीगने से बचें

📚 मौसमी ज्ञान

वर्षा ऋतु वह समय है जब शरीर की शक्ति और पाचन अग्नि सबसे कम होती है। यह वात के प्रकुपित होने और रोगों के फैलने का प्रमुख समय है। शुष्कता बनाए रखना और जठराग्नि (पाचन अग्नि) को पाचक मसालों से सहारा देना प्राथमिकता होनी चाहिए।